दिन - मंगलवार
तिथि - अमावस्या
नक्षत्र - चित्रा (परन्तु प्रदोषकाल के बाद स्वाती नक्षत्र का काल रहेगा)
योग - प्रीति योग
चन्द्रमा - तुला राशि में
सूर्यास्त का समय - 17:26 (भारतीय समयानुसार)
प्रदोष काल - 17:26 लेकर 19:50 तक
पूजन का शुभ समय:
पहला: प्रदोष काल
वैसे तो प्रदोष काल समय को दीपावली पूजन के लिये शुभ मुहूर्त के रुप में प्रयोग किया जाता है। किंतु प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न समय सबसे उतम रहता है जो कि 17:33 से लेकर 19:28 का समय है। इसके बाद 19:02 से 20:36 तक शुभ चौघडिया भी रहने से मुहुर्त की शुभता अधिक मानी जायेगी।
महत्व: प्रदोष काल में मंदिर में दीपदान, रंगोली और पूजा से जुडी अन्य तैयारी इस समय पर कर लेनी चाहिए तथा मिठाई वितरण का कार्य भी इसी समय पर संपन्न करना शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त द्वार पर स्वास्तिक और शुभ लाभ लिखने का कार्य इस मुहूर्त समय पर किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त इस समय पर अपने मित्रों व परिवार के बडे सदस्यों को उपहार देकर आशिर्वाद लेना व्यक्ति के जीवन की शुभता में वृद्धि करता है। मुहूर्त समय में धर्मस्थान पर दान इत्यादि करना कल्याणकारी है।
दूसरा: निशीथ काल
इस दिन निशीथ काल लगभग 20:10 से 22: 52 तक है। निशीथ काल में लाभ की चौघडिया भी रहेगी, ऎसे में व्यापारियों वर्ग के लिये लक्ष्मी पूजन के लिये इस समय की विशेष शुभता रहेगी।
महत्व: धन लक्ष्मी का आहवाहन एवं पूजन, गल्ले की पूजा तथा हवन इत्यादि कार्य सम्पूर्ण कर लेना चाहिए। इसके अतिरिक्त समय का प्रयोग श्री महालक्ष्मी पूजन, महाकाली पूजन, लेखनी, कुबेर पूजन, अन्य मंन्त्रों का जपानुष्ठान करना चाहिए।
महत्व: धन लक्ष्मी का आहवाहन एवं पूजन, गल्ले की पूजा तथा हवन इत्यादि कार्य सम्पूर्ण कर लेना चाहिए। इसके अतिरिक्त समय का प्रयोग श्री महालक्ष्मी पूजन, महाकाली पूजन, लेखनी, कुबेर पूजन, अन्य मंन्त्रों का जपानुष्ठान करना चाहिए।
तीसरा: महानिशीथ काल
13 नवम्बर की रात्री में 22:52 से लेकर अगले दिन प्राप्त: 01:34 मिनट तक महानिशीथ काल रहेगा। महानिशीथ काल कर्क लग्न के साथ होने से यह समय अधिक शुभ माना गया है। जो जन शास्त्रों के अनुसार दीपावली पूजन करना चाहते हो, उन्हें इस समय पूजा करनी चाहिए।
महत्व: महानिशीथकाल में मुख्यतः ज्योतिषविद, वेद् आरम्भ, कर्मकाण्ड, यंत्र-मंत्र-तंत्र कार्य व विभिन्न शक्तियों का पूजन किया जाता हैं एवं शक्तियों का आवाहन करना शुभ रहता है। अवधि में दीपावली पूजन के पश्चात गृह में एक चौमुखा दीपक रात भर जलता रहना चाहिए। यह दीपक लक्ष्मी एवं सौभाग्य में वृध्दि का प्रतीक माना जाता है।


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