भारतीय संस्कृति विभिन्न संस्कारों के द्वारा, धर्मपालन के द्वारा मानव को समुन्नत करने के उपाय तो बताती ही है, अन्तिम संस्कार के बाद भी जीव की सदगति के लिए किये जाने वाले संस्कारों का वर्णन करती है।
हिन्दू धर्म में मरणोत्तर संस्कारों में श्राद्ध विशेष है। श्राद्ध की महिमा एवं विधि का वर्णन विष्णु, वायु, वराह, मत्स्य आदि पुराणों एवं महाभारत, मनुस्मृति आदि शास्त्रों में यथास्थान किया गया है। मान्यता है कि पितरों के पुनीत आशीर्वाद से आपके कुल में दिव्य आत्माएँ अवतरित हो सकती हैं। जिन्होंने जीवन भर परिश्रम करके व संस्कार देकर हमें सुयोग्य बनाया उनके प्रति सामाजिक कर्त्तव्य-पालन अथवा उन पूर्वजों की प्रसन्नता, ईश्वर की प्रसन्नता अथवा अपने हृदय की शुद्धि के लिए सकाम व निष्काम भाव से यह श्राद्धकर्म करना चाहिए। इसिलिये शास्त्र कहता है 'श्रद्धया क्रियते तत् श्राद्धम्'
श्राद्ध पक्ष में संकल्प पूर्वक ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए। यदि ब्राह्मण भोजन न करा सकें तो भोजन का सामान ब्राह्मण को भेंट करने से भी संकल्प हो जाता है। कुश और काले तिल से संकल्प करें। इसके अलावा गाय, कुत्ता, कोआ, चींटी और देवताओं के लिए भोजन का भाग निकालकर खुले में रख दें। भोजन कराते समय चुप रहें। भोजन में इनका प्रयोग यथासंभव करें : दूध, गंगा जल, शहद, तुलसी।
श्राद्ध/पितृ पक्ष 2013: इस वर्ष श्राद्ध पक्ष 17 दिन का होगा:
पूर्णिमा श्राद्ध - 29 सितम्बर 2013
प्रतिपदा श्राद्ध - 30 सितम्बर 2013
द्वितिया श्राद्ध - 1 अक्तूबर 2013
त्रितिया श्राद्ध - 2 अक्तूबर 2013
चतुर्थी श्राद्ध - 3 अक्तूबर 2013
पन्चमी श्राद्ध - 4 अक्तूबर 2013
षष्ठी श्राद्ध - 6 अक्तूबर 2013
सप्तमी श्राद्ध - 7 अक्तूबर 2013
अष्टमी श्राद्ध - 8 अक्तूबर 2013
नवमी श्राद्ध - 9 अक्तूबर 2013 - सौभाग्यवति स्त्रियों का श्राद्ध
दशमी श्राद्ध - 10 अक्तूबर 2013
एकदशी श्राद्ध - 11 अक्तूबर 2013
द्वादशी श्राद्ध - 12 अक्तूबर 2013 - सन्यासियों का श्राद्ध
त्रयोदशी श्राद्ध - 13 अक्तूबर 2013
चतुर्दशी श्राद्ध - 14 अक्तूबर 2013 - विष, शस्त्र, डूबने, अकाल मृत्यु वालों का श्राद्ध
पन्चमी श्राद्ध - 15 अक्तूबर 2013 - सर्वपित्रि, अज्ञात तिथी वालों का श्राद्ध
हिन्दू धर्म में मरणोत्तर संस्कारों में श्राद्ध विशेष है। श्राद्ध की महिमा एवं विधि का वर्णन विष्णु, वायु, वराह, मत्स्य आदि पुराणों एवं महाभारत, मनुस्मृति आदि शास्त्रों में यथास्थान किया गया है। मान्यता है कि पितरों के पुनीत आशीर्वाद से आपके कुल में दिव्य आत्माएँ अवतरित हो सकती हैं। जिन्होंने जीवन भर परिश्रम करके व संस्कार देकर हमें सुयोग्य बनाया उनके प्रति सामाजिक कर्त्तव्य-पालन अथवा उन पूर्वजों की प्रसन्नता, ईश्वर की प्रसन्नता अथवा अपने हृदय की शुद्धि के लिए सकाम व निष्काम भाव से यह श्राद्धकर्म करना चाहिए। इसिलिये शास्त्र कहता है 'श्रद्धया क्रियते तत् श्राद्धम्'
श्राद्ध पक्ष में संकल्प पूर्वक ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए। यदि ब्राह्मण भोजन न करा सकें तो भोजन का सामान ब्राह्मण को भेंट करने से भी संकल्प हो जाता है। कुश और काले तिल से संकल्प करें। इसके अलावा गाय, कुत्ता, कोआ, चींटी और देवताओं के लिए भोजन का भाग निकालकर खुले में रख दें। भोजन कराते समय चुप रहें। भोजन में इनका प्रयोग यथासंभव करें : दूध, गंगा जल, शहद, तुलसी।
श्राद्ध/पितृ पक्ष 2013: इस वर्ष श्राद्ध पक्ष 17 दिन का होगा:
पूर्णिमा श्राद्ध - 29 सितम्बर 2013
प्रतिपदा श्राद्ध - 30 सितम्बर 2013
द्वितिया श्राद्ध - 1 अक्तूबर 2013
त्रितिया श्राद्ध - 2 अक्तूबर 2013
चतुर्थी श्राद्ध - 3 अक्तूबर 2013
पन्चमी श्राद्ध - 4 अक्तूबर 2013
षष्ठी श्राद्ध - 6 अक्तूबर 2013
सप्तमी श्राद्ध - 7 अक्तूबर 2013
अष्टमी श्राद्ध - 8 अक्तूबर 2013
नवमी श्राद्ध - 9 अक्तूबर 2013 - सौभाग्यवति स्त्रियों का श्राद्ध
दशमी श्राद्ध - 10 अक्तूबर 2013
एकदशी श्राद्ध - 11 अक्तूबर 2013
द्वादशी श्राद्ध - 12 अक्तूबर 2013 - सन्यासियों का श्राद्ध
त्रयोदशी श्राद्ध - 13 अक्तूबर 2013
चतुर्दशी श्राद्ध - 14 अक्तूबर 2013 - विष, शस्त्र, डूबने, अकाल मृत्यु वालों का श्राद्ध
पन्चमी श्राद्ध - 15 अक्तूबर 2013 - सर्वपित्रि, अज्ञात तिथी वालों का श्राद्ध
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